सूरसदन में ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पर भव्य आयोजन: कन्या पूजन, अन्नप्राशन और गोद भराई में झलकी संस्कृति और सशक्तिकरण की तस्वीर

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़) |

आगरा | 20 मार्च 2026

उत्तर प्रदेश सरकार के ‘नव निर्माण के 9 वर्ष’ पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आगरा के प्रतिष्ठित सूरसदन प्रेक्षागृह में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा एक भव्य, भावनात्मक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया।

कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि यह भारतीय परंपराओं, सामाजिक जागरूकता और महिला सशक्तिकरण का एक जीवंत संगम बनकर सामने आया, जिसमें कन्या पूजन, कन्या जन्मोत्सव, गोद भराई और अन्नप्राशन जैसे संस्कारों के माध्यम से समाज को सकारात्मक संदेश दिया गया।

परंपरा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ किया गया। जैसे ही दीप जला, पूरे सभागार में आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक गरिमा का वातावरण बन गया। उपस्थित लोगों ने इस क्षण को भारतीय परंपरा के सम्मान और संस्कारों की पुनर्स्थापना के रूप में अनुभव किया।

बेटियों का सम्मान: कन्या पूजन बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का सबसे भावुक और प्रेरणादायक हिस्सा नवजात बच्चियों का सम्मान रहा। नवजात बालिकाओं को बेबी किट प्रदान की गई, जिसमें उनके प्रारंभिक जीवन के लिए आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं।

इसके साथ ही परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार बच्चियों का रोली टीका कर, उन्हें लाल चुनरी ओढ़ाई गई और फल भेंट कर विधिवत कन्या पूजन किया गया। यह दृश्य न केवल भावनात्मक था, बल्कि समाज को यह संदेश भी दे रहा था कि बेटी का जन्म उत्सव का विषय है, न कि चिंता का।

गोद भराई और अन्नप्राशन: जीवन के संस्कारों का उत्सव

कार्यक्रम में गर्भवती महिलाओं के लिए गोद भराई रस्म का आयोजन किया गया, जिसमें उन्हें आशीर्वाद और उपहार देकर मातृत्व के इस विशेष चरण का सम्मान किया गया।

साथ ही 6 माह तक के बच्चों के लिए अन्नप्राशन संस्कार भी विधिविधान से संपन्न कराया गया। इन संस्कारों के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि भारतीय संस्कृति में जीवन के हर पड़ाव को संस्कारों से जोड़कर देखा जाता है।

“संस्कार ही संस्कृति और राष्ट्र की पहचान” – डॉ. बबीता सिंह चौहान

अपने प्रेरणादायक संबोधन में डॉ. बबीता सिंह चौहान ने कहा कि “संस्कार जिंदा रहेंगे तो संस्कृति जिंदा रहेगी, और संस्कृति से ही किसी भी राष्ट्र की पहचान बनी रहती है। यदि संस्कृति समाप्त हो गई, तो राष्ट्र का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।”

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा ऐसे कार्यक्रमों को बढ़ावा देना इस बात का संकेत है कि सरकार केवल विकास ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण के लिए भी प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि सनातन परंपराओं में जन्म से लेकर जीवन के अंतिम चरण तक संस्कारों का विशेष महत्व है, जो समाज को दिशा और पहचान देते हैं।

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कन्या सुमंगला योजना: बेटियों के लिए सुरक्षा और सम्मान

डॉ. चौहान ने मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना को बेटियों के लिए एक महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि इस योजना के माध्यम से जन्म से लेकर शिक्षा और विवाह तक आर्थिक सहायता दी जा रही है।

उन्होंने कहा कि इस योजना के कारण अब समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण सकारात्मक हुआ है और भ्रूण हत्या जैसी कुप्रथाओं में कमी आई है। अब गरीब परिवार भी बेटी के जन्म पर खुशी मनाते हैं और उसे सम्मानपूर्वक घर लाते हैं।

उन्होंने सामूहिक विवाह योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि सरकार द्वारा प्रति जोड़े को 1 लाख रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिली है।

महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता पर जोर

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया गया है, जिससे महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान में प्रदेश की कानून व्यवस्था इतनी सुदृढ़ हो चुकी है कि महिलाएं अब किसी भी समय बिना भय के बाहर आ-जा सकती हैं।

सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से सावधान रहने की अपील

डॉ. चौहान ने अपने संबोधन में महिलाओं और अभिभावकों को एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि वे सोशल मीडिया के अत्यधिक उपयोग से बचें और अपने बच्चों को भी इससे दूर रखें।

उन्होंने कहा कि “रील्स और मोबाइल पर समय बिताने के बजाय परिवार और बच्चों के साथ समय बिताएं और उन्हें अच्छे संस्कार दें।”

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि आयोग द्वारा कक्षा 5 तक के बच्चों को मोबाइल या ऑनलाइन माध्यम से होमवर्क न देने पर पाबंदी लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

योजनाओं के लाभार्थियों का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान महिला कल्याण विभाग की विभिन्न योजनाओं—जैसे बाल श्रम उन्मूलन, बाल विवाह रोकथाम और मिशन शक्ति अभियान 5.0—से जुड़े प्रतिभागियों को सम्मान पत्र प्रदान किए गए।

साथ ही मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र वितरित कर उन्हें योजनाओं से जोड़ने का कार्य किया गया।

प्रदर्शनी में दिखीं सरकार की उपलब्धियां

कार्यक्रम के पश्चात डॉ. बबीता सिंह चौहान ने सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा सूरसदन में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस प्रदर्शनी में सरकार की विभिन्न योजनाओं और उपलब्धियों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया था।

उन्होंने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी आम जनता को योजनाओं के प्रति जागरूक करने का प्रभावी माध्यम है।

अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी

कार्यक्रम में जिला प्रोबेशन अधिकारी अतुल सोनी, जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज कुमार मौर्य, जिला सूचना अधिकारी शीलेंद्र कुमार शर्मा सहित कई अधिकारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

संस्कृति, संवेदना और सशक्तिकरण का संदेश

पूरा कार्यक्रम इस बात का प्रमाण बना कि जब सरकार, समाज और संस्कृति एक साथ चलते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन निश्चित होता है। यह आयोजन न केवल बेटियों के सम्मान और महिलाओं के सशक्तिकरण का प्रतीक बना, बल्कि समाज को यह भी संदेश दे गया कि हमारी जड़ें जितनी मजबूत होंगी, हमारा भविष्य उतना ही उज्ज्वल होगा।

सूरसदन का यह आयोजन निश्चित रूप से लोगों के मन में एक सकारात्मक छाप छोड़ गया और आने वाले समय में ऐसे कार्यक्रमों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।

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