परिषदीय विद्यालयों के बच्चे बनेंगे स्मार्ट, अब स्मार्ट बोर्ड पर होगी आधुनिक डिजिटल पढ़ाई

तकनीक से सशक्त होगी सरकारी शिक्षा व्यवस्था, निजी स्कूलों की तर्ज पर स्मार्ट क्लासरूम का विस्तार

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)

आगरा, 23 जनवरी 2026।

आगरा। परिषदीय विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था अब एक नए डिजिटल युग में प्रवेश कर चुकी है। समग्र शिक्षा अभियान एवं पीएम श्री योजना के अंतर्गत राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अनुरूप जनपद आगरा में सरकारी स्कूलों को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत 427 परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड स्थापित किए जा चुके हैं, वहीं 56 विद्यालयों में अत्याधुनिक आईसीटी लैब की स्थापना की गई है, जिनमें प्रत्येक विद्यालय को 2 से 12 कंप्यूटर उपलब्ध कराए गए हैं।

यह पहल केवल उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य शिक्षा के पूरे स्वरूप को बदलना है—जहाँ अब बच्चे किताबों के साथ-साथ डिजिटल कंटेंट, वीडियो, एनिमेशन, इंटरैक्टिव लर्निंग मॉड्यूल और स्मार्ट क्लासरूम तकनीक के माध्यम से सीखेंगे। इससे विद्यार्थियों में समझने की क्षमता, रुचि, तर्कशक्ति और नवाचार की भावना विकसित होगी।

सरकारी स्कूलों में निजी स्कूलों जैसी सुविधाएं

अब परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी निजी स्कूलों की तरह:

  • स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई करेंगे

  • डिजिटल लाइब्रेरी से अध्ययन सामग्री प्राप्त करेंगे

  • कंप्यूटर आधारित प्रोजेक्ट व प्रेजेंटेशन बनाएंगे

  • वीडियो लेक्चर, एनिमेशन और ई-कंटेंट के माध्यम से विषयों को समझेंगे

इससे शिक्षा में समान अवसर (Equal Opportunity) की भावना को मजबूती मिलेगी और सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी तकनीकी रूप से दक्ष बनने का अवसर मिलेगा।

शिक्षकों को दिया जा रहा विशेष डिजिटल प्रशिक्षण

डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), आगरा में विशेष दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के तहत:

  • 427 विद्यालयों से प्रत्येक विद्यालय के दो-दो शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है

  • स्मार्ट बोर्ड संचालन

  • कंप्यूटर बेसिक एवं एडवांस्ड उपयोग

  • डिजिटल कंटेंट चयन

  • ऑनलाइन संसाधनों का शैक्षणिक प्रयोग

  • स्मार्ट क्लासरूम मैनेजमेंट
    पर विशेष फोकस किया जा रहा है।

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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल लाइब्रेरी का समावेश

प्रशिक्षण में आधुनिक तकनीकों को भी शामिल किया गया है।
संदर्भदाता तेजेंद्र सिंह एवं अजय कुमार शर्मा द्वारा:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के शैक्षिक उपयोग

  • डिजिटल शिक्षा में AI की भूमिका

  • साइबर सुरक्षा व डिजिटल सावधानियां

  • डिजिटल लाइब्रेरी के प्रभावी उपयोग
    पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

वहीं प्रशिक्षक जितेंद्र सिंह, जयकांत एवं अनिल कुमार द्वारा:

  • स्मार्ट बोर्ड की तकनीकी कार्यप्रणाली

  • डिजिटल टूल्स का प्रयोग

  • मल्टीमीडिया कंटेंट का चयन

  • कक्षा-कक्ष में तकनीक आधारित शिक्षण विधियाँ
    सिखाई जा रही हैं।

नेतृत्व का स्पष्ट विज़न

डायट प्राचार्य अनिरुद्ध यादव ने प्रशिक्षण के दौरान कहा—

“इस कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना है, ताकि वे बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और समयानुकूल शिक्षा दे सकें। परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राएं भी अब तकनीकी दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ेंगे।”

प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. मनोज कुमार वार्ष्णेय ने बताया—

“विज्ञान विषय की पुस्तकों में कंप्यूटर एवं डिजिटल शिक्षा से जुड़े अध्यायों का विस्तार किया गया है। पीएम श्री विद्यालयों में स्थापित डिजिटल लाइब्रेरी के नियमित व प्रभावी उपयोग का प्रशिक्षण भी शिक्षकों को दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण फरवरी माह के द्वितीय सप्ताह तक सभी शिक्षकों को प्रदान कर दिया जाएगा।”

प्रथम बैच का सफल समापन

प्रथम चरण में जनपद के 100 शिक्षकों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जिनका प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। समापन अवसर पर सभी प्रशिक्षित शिक्षकों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए।
इस कार्यक्रम के सफल संचालन में प्रवक्ता अनिल कुमार, यशवीर सिंह, कल्पना सिन्हा, हिमांशु सिंह सहित समस्त डायट स्टाफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

शिक्षा में डिजिटल क्रांति की ओर आगरा

इस पहल से आगरा जनपद के परिषदीय विद्यालयों में:

  • शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार

  • बच्चों की सीखने की गति में वृद्धि

  • तकनीकी दक्षता का विकास

  • डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा

  • 21वीं सदी के कौशल (21st Century Skills) का निर्माण

जैसे सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेंगे।
यह पहल न केवल शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाएगी, बल्कि सरकारी विद्यालयों की छवि को भी एक आधुनिक, तकनीक-संपन्न और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा संस्थान के रूप में स्थापित करेगी।

अब परिषदीय विद्यालय सिर्फ स्कूल नहीं, बल्कि “स्मार्ट लर्निंग सेंटर” बनते जा रहे हैं — जहाँ बच्चे भविष्य के लिए तैयार हो रहे हैं।

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