मण्डलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई मण्डलीय समीक्षा बैठक: कर वसूली, राजस्व निस्तारण और दीपावली सुरक्षा पर दिए अहम निर्देश
रिपोर्ट: एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा | दिनांक – 09 अक्टूबर 2025
आगरा मण्डल में कर करेत्तर व राजस्व वसूली के कार्यों की प्रगति को लेकर मण्डलायुक्त शैलेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को एक विस्तृत ऑनलाइन मण्डलीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी और आगरा जिलों के समस्त जिलाधिकारी, अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी व तहसीलदार शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य था – राजस्व वसूली की स्थिति का विश्लेषण, विभागवार प्रगति की समीक्षा और आगामी दीपावली पर्व से पूर्व प्रशासनिक तैयारियों की दिशा तय करना।
वाणिज्य कर और स्टाम्प विभाग की समीक्षा
मण्डलायुक्त ने बताया कि मथुरा जिले ने वाणिज्य कर वसूली में सबसे अच्छी प्रगति दर्ज की है, जबकि फिरोजाबाद की स्थिति बेहद कमजोर रही। उन्होंने निर्देश दिए कि फिरोजाबाद में वसूली की गति को प्राथमिकता के साथ सुधारा जाए।
स्टाम्प एवं रजिस्ट्रेशन विभाग में मथुरा को छोड़कर अन्य जिलों – आगरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी में वसूली की रफ्तार धीमी पाई गई। आयुक्त ने सख्त लहजे में कहा कि “मांग के अनुपात में वसूली का प्रतिशत बढ़ाना अनिवार्य है, विशेष रूप से आगरा में।”
परिवहन और विद्युत विभाग की स्थिति
परिवहन विभाग में आगरा और फिरोजाबाद की प्रगति अपेक्षाकृत कम रही, वहीं विद्युत देयों में भी फिरोजाबाद सबसे पीछे रहा। मण्डलायुक्त ने कहा कि “राजस्व वसूली केवल आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि वित्तीय अनुशासन और शासन की विश्वसनीयता का प्रतिबिंब है।” उन्होंने अधिकारियों को चेताया कि वसूली सुधार पर साप्ताहिक समीक्षा रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें।
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खनिज और अन्य कर मदों की स्थिति
खनिज विभाग में मैनपुरी की प्रगति कमजोर पाई गई। निर्देश दिए गए कि अवैध खनन पर सख्ती के साथ राजस्व सृजन के वैध साधनों को बढ़ाया जाए।
समग्र मूल्यांकन में यह पाया गया कि मथुरा को छोड़कर तीनों जिलों – आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी की वसूली दर निर्धारित लक्ष्यों से कम है। आयुक्त ने कहा कि “लक्ष्य प्रतिशत प्राप्ति हर जिले की प्राथमिकता होनी चाहिए।”
मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना
बैठक में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना की गहन समीक्षा भी की गई। मण्डलायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी लंबित प्रकरणों का त्वरित निस्तारण किया जाए और किसानों या उनके परिजनों को राहत राशि शीघ्र वितरित की जाए।
उन्होंने बताया कि अंश निर्धारण और खतौनी पुनरीक्षण के मामलों में शिकायतें बढ़ रही हैं, अतः जिलाधिकारी स्वयं इस प्रक्रिया की निगरानी करें ताकि कोई पात्र किसान लाभ से वंचित न रहे।
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राजस्व वाद निस्तारण: गुणवत्तापूर्ण सुनवाई पर जोर
राजस्व न्यायालयों के वादों की समीक्षा में यह पाया गया कि आगरा को छोड़कर अन्य जिलों में प्रगति धीमी रही। आयुक्त ने कहा कि “वादों का केवल निस्तारण नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण निस्तारण आवश्यक है।”
उन्होंने सभी जिलों के उपजिलाधिकारी, तहसीलदार और नायाब तहसीलदारों को निर्देशित किया कि प्रति माह कम से कम 100 वादों का निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाए, और 5 वर्ष से अधिक पुराने मामलों को प्राथमिकता दी जाए।
धारा-वार समीक्षा एवं त्वरित कार्रवाई
राजस्व विभाग की विभिन्न धाराओं की समीक्षा में कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए –
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धारा 24: आगरा और फिरोजाबाद में वाद निस्तारण में सुधार लाया जाए।
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धारा 33: समय सीमा में गुणवत्तापूर्ण निर्णय सुनिश्चित हो।
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धारा 34: 3 वर्ष से अधिक लंबित वादों को तत्काल निस्तारित किया जाए।
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धारा 38(2): 1 वर्ष से अधिक पुराने वादों पर विशेष ध्यान।
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धारा 67 व 101: लेखपालों के कार्य की निगरानी जिलाधिकारी स्तर पर की जाए ताकि रैंकिंग और विश्वसनीयता दोनों में सुधार हो।
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दीपावली से पहले सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर जोर
बैठक के अंत में मण्डलायुक्त ने आगामी दीपावली पर्व को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए।
उन्होंने कहा कि –
“किसी भी जिले में अवैध रूप से आतिशबाजी का निर्माण या बिक्री नहीं होनी चाहिए। सभी दुकानों का लाइसेंस समय पर जारी किया जाए और केवल निर्धारित स्थानों पर ही अस्थायी दुकानें लगाई जाएं।”
इसके साथ ही आकस्मिक सुरक्षा व्यवस्था, अग्निशमन की तैयारियों और भीड़ नियंत्रण उपायों के लिए संबंधित विभागों को मुस्तैद रहने के निर्देश दिए गए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
बैठक में अपर आयुक्त (प्रशासन) राजेश कुमार,
जिलाधिकारी आगरा अरविंद मलप्पा बंगारी,
जिलाधिकारी मथुरा सी.पी. सिंह,
जिलाधिकारी फिरोजाबाद रमेश रंजन,
जिलाधिकारी मैनपुरी अंजनी सिंह,
सहित सभी अपर जिलाधिकारी, उपजिलाधिकारी व तहसीलदार उपस्थित रहे।
निष्कर्ष
इस मण्डलीय समीक्षा बैठक ने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि राजस्व वसूली, पारदर्शिता और उत्तरदायित्व शासन की रीढ़ हैं। मण्डलायुक्त के सख्त निर्देशों से यह उम्मीद बंधी है कि आगामी महीनों में वसूली दर और निस्तारण दोनों में तेजी देखने को मिलेगी।
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