केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूर्ण होने पर कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी में प्राकृतिक खेती कार्यशाला का आयोजन, किसानों को टिकाऊ कृषि की राह दिखाने का संकल्प

प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और किसान समृद्धि पर हुई व्यापक चर्चा, प्रगतिशील किसानों को किया गया सम्मानित

प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी बोले – प्राकृतिक खेती केवल खेती नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य की सुरक्षा का अभियान

एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)

आगरा, 19 जून 2026।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के विश्वास, विकास और जनकल्याण को समर्पित 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में कृषि विज्ञान केंद्र बिचपुरी, आगरा में एक भव्य प्राकृतिक खेती कार्यशाला, विकास प्रदर्शनी एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के प्रति जागरूक करना था, ताकि खेती को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और स्वास्थ्य के अनुकूल बनाया जा सके।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों, कृषि विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने सहभागिता की। कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में लगाए गए विभिन्न विभागों के विकास स्टॉलों ने किसानों का विशेष ध्यान आकर्षित किया, जहां उन्हें सरकार द्वारा संचालित योजनाओं, अनुदानों और कृषि तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर प्रदेश सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग के मंत्री एवं जनपद प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी तथा फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने दीप प्रज्ज्वलित एवं फीता काटकर किया।

इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती प्रतिभा सिंह, किसान समृद्धि आयोग के सदस्य ऋषि कुमार, उप कृषि निदेशक मुकेश कुमार, जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार, जिला उद्यान अधिकारी मनोज चतुर्वेदी, कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक आर.एस. चौहान सहित अनेक कृषि वैज्ञानिक, विभागीय अधिकारी एवं किसान उपस्थित रहे।

विकास प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में कृषि विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, सिंचाई विभाग, वर्षा जल संचयन, प्राकृतिक खेती और कृषि यंत्रीकरण से संबंधित कई स्टॉल लगाए गए।

किसानों ने इन स्टॉलों का अवलोकन कर सरकारी योजनाओं, कृषि नवाचारों, आधुनिक तकनीकों और प्राकृतिक खेती के मॉडल की जानकारी प्राप्त की।

विशेषज्ञों ने किसानों को बताया कि किस प्रकार कम लागत में प्राकृतिक खेती अपनाकर उत्पादन लागत को कम किया जा सकता है और बेहतर गुणवत्ता वाली फसल प्राप्त की जा सकती है।

प्रगतिशील किसानों को मिला सम्मान

कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले किसानों को सम्मानित किया गया।

प्राकृतिक खेती को सफलतापूर्वक अपनाने वाले कृषकों अक्षय कुमार, कल्पना मिश्रा, घनश्याम, नवल सिंह और मान सिंह को अंगवस्त्र एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

इसके अलावा श्यामवीर, समस्ती, थान सिंह, शेर सिंह और धर्मेंद्र को कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने हेतु ट्रैक्टर की चाबी प्रदान की गई। वहीं 10 किसानों को रागी मिनीकिट वितरित किए गए, जिससे पोषणयुक्त फसलों के उत्पादन को बढ़ावा मिल सके।

प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन बनाने की जरूरत

अपने संबोधन में प्रभारी मंत्री भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले 12 वर्षों में विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य किए हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा जनता के सामने अपने कार्यों का रिपोर्ट कार्ड प्रस्तुत करने में विश्वास रखती है। सरकार की नीतियों और योजनाओं का सीधा लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि आज कृषि क्षेत्र अनेक चुनौतियों से गुजर रहा है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग ने मिट्टी की उर्वरता को प्रभावित किया है और पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल खेती की एक तकनीक नहीं, बल्कि भूमि, पर्यावरण, जल और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा का प्रभावी माध्यम है। यदि हम आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य देना चाहते हैं तो प्राकृतिक खेती को जन आंदोलन का रूप देना होगा।

मिट्टी और स्वास्थ्य दोनों के लिए जरूरी है बदलाव

भूपेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि आधुनिक कृषि में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग के कारण मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता लगातार कम हो रही है।

इसके अलावा रसायनों के अवशेष खाद्यान्न के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंच रहे हैं, जिससे कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।

उन्होंने किसानों से अपील की कि वे धीरे-धीरे प्राकृतिक खेती, जैविक खाद, गोबर खाद और जैविक कृषि पद्धतियों को अपनाएं।

किसानों के लिए सरकार की प्रमुख योजनाएं

प्रभारी मंत्री ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं।

उन्होंने बताया कि किसानों के हित में संचालित प्रमुख योजनाओं में—

  • प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना
  • पीएम-कुसुम योजना
  • कृषि यंत्रीकरण योजना
  • राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन
  • आत्मा योजना
  • परंपरागत कृषि विकास योजना
  • मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
  • फसल ऋण मोचन योजना
  • निःशुल्क सिंचाई सुविधा

जैसी योजनाएं शामिल हैं।

इन योजनाओं का उद्देश्य किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और कृषि को अधिक लाभकारी बनाना है।

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सांसद राजकुमार चाहर ने जताई चिंता

फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर ने कहा कि देश में लंबे समय से उत्पादन बढ़ाने के लिए रासायनिक उर्वरकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है, लेकिन इसके दुष्प्रभाव अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं।

उन्होंने कहा कि मिट्टी की गुणवत्ता लगातार गिर रही है और खाद्यान्न की पोषण क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

सांसद ने कहा कि रासायनिक अवशेष खाद्य पदार्थों के माध्यम से लोगों के शरीर में पहुंचकर विभिन्न प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रहे हैं।

उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती और जैविक खेती की ओर कदम बढ़ाने की अपील की।

प्राकृतिक खेती से बढ़ेगी किसानों की आय

कृषि विशेषज्ञों ने कार्यशाला में बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की लागत में कमी आती है।

रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और महंगे कृषि रसायनों पर निर्भरता कम होने से उत्पादन लागत घटती है, जबकि बाजार में जैविक और प्राकृतिक उत्पादों की मांग बढ़ने के कारण किसानों को बेहतर मूल्य भी प्राप्त होता है।

विशेषज्ञों ने कहा कि प्राकृतिक खेती केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करती, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में भी मददगार साबित हो सकती है।

किसानों ने साझा किए अपने अनुभव

कार्यक्रम के दौरान प्राकृतिक खेती अपनाने वाले कई प्रगतिशील किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।

उन्होंने बताया कि शुरुआत में कुछ चुनौतियां जरूर आईं, लेकिन समय के साथ मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार हुआ, उत्पादन स्थिर हुआ और खेती की लागत में कमी आई।

किसानों ने अन्य कृषकों से भी प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की और बताया कि यह खेती का भविष्य है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है खेती का भविष्य

कार्यक्रम में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान, जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जैव विविधता संरक्षण जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई।

विशेषज्ञों ने कहा कि खेती और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण नहीं किया गया तो भविष्य में कृषि क्षेत्र को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

उत्साहपूर्ण सहभागिता से सफल हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी, तकनीकी परामर्श, कृषि नवाचार और प्राकृतिक खेती के मॉडल ने किसानों को नई दिशा देने का कार्य किया।

कार्यक्रम के अंत में किसानों ने प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने का सामूहिक संकल्प लिया।

“प्राकृतिक खेती केवल खेतों की नहीं, बल्कि समाज, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का अभियान है। यदि किसान, वैज्ञानिक और सरकार मिलकर प्रयास करें तो भारत की कृषि दुनिया के लिए एक आदर्श मॉडल बन सकती है।”

 

 

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