मिशन शक्ति अभियान का अनोखा प्रयास: कक्षा-6 की छात्रा पीहू बनीं एक दिन की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, बालिकाओं ने सीखी बैंकिंग व्यवस्था
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 25 सितम्बर 2025
आमतौर पर जब हम जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में एक अनुभवी अधिकारी की छवि उभरती है। लेकिन इस बार नजारा कुछ अलग था। कक्षा-6 की नन्हीं छात्रा पीहू जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की कुर्सी पर बैठीं तो यह पल केवल उनके लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा जगत के लिए ऐतिहासिक बन गया। यह अवसर उन्हें ऑपरेशन 5.0 मिशन शक्ति अभियान के अंतर्गत मिला, जिसका उद्देश्य बालिकाओं को नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना है।
मिशन शक्ति अभियान क्या है?
उत्तर प्रदेश सरकार ने महिलाओं और बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन को प्राथमिकता देते हुए मिशन शक्ति अभियान की शुरुआत की थी। वर्तमान में इसका पांचवां चरण (ऑपरेशन 5.0) पूरे प्रदेश में संचालित हो रहा है।
इस चरण की विशेषता यह है कि—
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बालिकाओं को एक दिन के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी जा रही है।
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उन्हें विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर आसीन करके यह अनुभव कराया जा रहा है कि वे भविष्य में भी नेतृत्व की जिम्मेदारी निभा सकती हैं।
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अभियान का मकसद बालिकाओं में आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता का विकास करना है।
जब पीहू बनीं बीएसए
आगरा के कम्पोजिट विद्यालय डायट परिसर, नगर क्षेत्र की छात्रा पीहू को जब एक दिन के लिए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) आगरा का चार्ज सौंपा गया, तो उनके चेहरे पर आत्मविश्वास साफ झलक रहा था।
उन्होंने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए जाना कि—
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कैसे मिड-डे मील योजना लागू की जाती है और लाखों बच्चों तक भोजन पहुँचाया जाता है।
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डीबीटी योजना के जरिए विद्यार्थियों को यूनिफॉर्म और शैक्षिक सामग्री कैसे मिलती है।
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कायाकल्प योजना से स्कूलों का कायापलट कैसे होता है।
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जिला मुख्यालय से लेकर गाँव के स्कूलों तक योजनाओं का क्रियान्वयन किस तरह होता है।
इस अनुभव ने पीहू को यह समझाया कि शिक्षा विभाग केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के भविष्य को आकार देने का एक बड़ा दायित्व है।
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जब बालिकाएँ पहुँचीं बैंक
कार्यक्रम के तहत विभिन्न विद्यालयों की दर्जनों बालिकाओं को केनरा बैंक, साकेत कॉलोनी, आगरा सहित कई बैंकों का भ्रमण कराया गया।
यहाँ उन्हें बताया गया कि—
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बैंक में खाता कैसे खोला जाता है।
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पैसों का लेन-देन और डिजिटल बैंकिंग कैसे काम करती है।
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बचत और निवेश का महत्व क्या है।
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वित्तीय साक्षरता क्यों जरूरी है और यह कैसे भविष्य को सुरक्षित बनाती है।
बालिकाओं ने स्वयं बैंक स्टाफ से सवाल पूछे और व्यावहारिक ज्ञान हासिल किया। इस पहल ने उन्हें समझाया कि आर्थिक रूप से सक्षम होना ही असली सशक्तिकरण है।
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अभियान का असर
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यह कार्यक्रम बालिकाओं के लिए एक प्रेरणादायी संदेश बनकर सामने आया।
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उन्होंने महसूस किया कि पढ़ाई ही नहीं, बल्कि नेतृत्व और आर्थिक ज्ञान भी उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आवश्यक है।
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पीहू जैसी छात्रा का बीएसए बनना इस बात का प्रमाण है कि आज की बेटियाँ भविष्य की नीति निर्धारक और प्रशासक बन सकती हैं।
निष्कर्ष
ऑपरेशन 5.0 मिशन शक्ति अभियान ने यह साबित कर दिया कि सही दिशा और अवसर मिलने पर बेटियाँ किसी भी मुकाम तक पहुँच सकती हैं।
कक्षा-6 की नन्हीं पीहू का बीएसए बनना और अन्य छात्राओं का बैंक भ्रमण केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह एक संदेश था—
कि बेटियाँ अब केवल सपने नहीं देखेंगी, बल्कि उन्हें हकीकत में बदलेंगी।
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