कागारौल दुर्गा विसर्जन 2025 में भक्तिमय वातावरण के बीच मां दुर्गा की प्रतिमा का विधि-विधान से हुआ विसर्जन
एस. शेरवानी (ब्यूरो चीफ़)
आगरा। 01-10-2025
खेरागढ़/कागारौल। नवरात्रि महोत्सव के समापन पर कागारौल क्षेत्र के गांव गढ़मुक्खा में मां दुर्गा की प्रतिमा का विधि-विधान से भव्य विसर्जन किया गया। पूरे गांव में भक्ति और आस्था का ऐसा वातावरण बना कि हर कोई भाव-विभोर हो उठा।
नौ दिन तक चला उत्सव, गूंजते रहे मां के जयकारे
नवरात्रि के अवसर पर गांव गढ़मुक्खा के चौक मोहल्ले में भव्य पंडाल सजाया गया था। नौ दिनों तक सुबह-शाम पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठान हुए।
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बच्चों और महिलाओं ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए।
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हर दिन शाम को झांकियां और नाट्य प्रस्तुतियों ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
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पंडाल में सजावट और प्रकाश व्यवस्था इतनी मनमोहक थी कि भक्तजन दूर-दूर से इसे देखने आते रहे।
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भावुक कर देने वाला पल – आंसुओं के साथ मां की विदाई
अंतिम दिन जब प्रतिमा विसर्जन की बारी आई, तो माहौल भावुक हो उठा। भक्तजन आंखों में आंसू लिए मां के जयकारे लगाते हुए पंडाल से विदा करने लगे।
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प्रतिमा को विशेष रूप से सजी हुई ट्रैक्टर-ट्रॉली में स्थापित किया गया।
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महिलाएं और बच्चे डीजे की धुन पर झूमते-गाते आगे बढ़े।
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पूरा मार्ग “जय माता दी” और “मां दुर्गा की जय” के नारों से गूंजता रहा।
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पांच किलोमीटर पैदल यात्रा में उमड़ा सैलाब
विसर्जन यात्रा लगभग 5 किलोमीटर लंबी पैदल यात्रा रही, जो गांव गढ़मुक्खा से निकलकर आगरा-जगनेर मार्ग स्थित अकोला खारी नदी तक पहुंची।
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यात्रा में सैकड़ों भक्तजन शामिल हुए।
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डीजे की धुन पर झूमते युवाओं ने माहौल को उत्साहपूर्ण बना दिया।
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महिलाएं थालियों में नारियल और कलश लिए हुए आगे बढ़ीं।
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बच्चे झंडे और त्रिशूल लेकर यात्रा में पूरे उत्साह से शामिल रहे।
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विधि-विधान के बीच नदी तट पर हुआ विसर्जन
नदी किनारे पहुंचते ही पंडितों ने मंत्रोच्चारण और हवन-पूजन कर विधिवत पूजा संपन्न कराई। इसके बाद भक्तों ने मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया।
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पूजा में सिंदूर, पुष्प, फल और प्रसाद अर्पित किए गए।
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भक्तों ने मां से अपने गांव-परिवार की समृद्धि, सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य की प्रार्थना की।
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विसर्जन के बाद भक्तों ने एक-दूसरे को प्रसाद बांटा और मां के आशीर्वाद का स्मरण किया।
समाज में एकता और संस्कृति का संदेश
यह आयोजन सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसने गांव में सामूहिक सहयोग और एकता की मिसाल भी पेश की।
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आयोजन में गांव की महिलाओं ने प्रमुख भूमिका निभाई।
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बच्चों और युवाओं ने पंडाल से लेकर यात्रा और प्रसाद वितरण तक में सक्रिय सहयोग दिया।
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बुजुर्गों ने धार्मिक गीत गाकर वातावरण को और भी भक्तिमय बनाया।
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